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सूरजपुर/प्रतापपुर। छत्तीसगढ़ के सूरजपुर जिले के प्रतापपुर क्षेत्र में हाथियों की मौजूदगी के बीच एक युवक की मौत का मामला सामने आया है। दरहोरा गांव में 30 वर्षीय प्रमोद राजवाड़े, पिता कामेश्वर राजवाड़े का शव गांव से लगे खेत में मिला। युवक रविवार से लापता था। परिजन और ग्रामीण उसकी तलाश कर रहे थे, लेकिन सोमवार को शव मिलने के बाद परिवार में मातम छा गया और गांव में शोक का माहौल बन गया।

जानकारी के मुताबिक, प्रमोद के लापता होने के बाद परिजन आसपास के इलाकों में लगातार उसकी खोजबीन कर रहे थे। इसी दौरान खेत के आसपास हाथियों के पैरों के निशान दिखाई दिए। ग्रामीणों ने निशानों के आधार पर तलाश आगे बढ़ाई, जिसके बाद खेत में युवक का शव बरामद हुआ। प्रारंभिक तौर पर मौत को हाथी के हमले से जोड़कर देखा जा रहा है। हालांकि, घटना की वास्तविक परिस्थितियों की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।
घटना की सूचना मिलने पर वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और मामले से जुड़ी जानकारी जुटाई।
क्षेत्र में हाथियों की आवाजाही से ग्रामीणों में डर
ग्रामीणों के अनुसार, इलाके में पिछले कई दिनों से हाथियों की आवाजाही बनी हुई है। हाथियों के झुंड के खेतों और आबादी के आसपास पहुंचने से लोगों की चिंता बढ़ गई है। खेतों में काम करने वाले ग्रामीणों के साथ-साथ सुबह और शाम आने-जाने वाले लोगों को भी सतर्क रहना पड़ रहा है।
ग्रामीणों का कहना है कि हाथी प्रभावित गांवों में निगरानी बढ़ाने, नियमित गश्त करने और हाथियों की गतिविधियों की जानकारी समय पर पहुंचाने की जरूरत है। उनका मानना है कि समय रहते चेतावनी मिलने से लोग सतर्क रह सकते हैं और ऐसी घटनाओं का जोखिम कम किया जा सकता है।
मृतक के परिवार को मुआवजा देने की मांग
युवक की मौत के बाद ग्रामीणों ने शासन के नियमानुसार मृतक के परिजनों को जल्द मुआवजा देने की मांग उठाई है। ग्रामीणों का कहना है कि परिवार ने अपने सदस्य को खोया है, ऐसे में प्रशासन और वन विभाग को संवेदनशीलता के साथ सहायता उपलब्ध करानी चाहिए।
इसके साथ ही हाथी प्रभावित क्षेत्रों की पहचान कर वहां सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने की मांग भी की गई है। ग्रामीण चाहते हैं कि हाथियों की गतिविधियों पर लगातार नजर रखी जाए और सूचना तंत्र को प्रभावी बनाया जाए, ताकि गांवों के लोगों को समय रहते सावधान किया जा सके।
मांगें पूरी नहीं हुईं तो आंदोलन की चेतावनी
घटना के बाद क्षेत्र में मानव-हाथी संघर्ष को लेकर चिंता फिर बढ़ गई है। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर समय रहते ठोस पहल नहीं हुई, तो वे आंदोलन का रास्ता अपना सकते हैं।
फिलहाल, घटना की परिस्थितियों और मौत के कारणों को लेकर आधिकारिक पुष्टि का इंतजार है। ग्रामीणों की मांग है कि जांच के साथ-साथ प्रभावित गांवों में सुरक्षा और निगरानी के लिए प्रभावी कदम भी उठाए जाएं।