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9 दिन से धरने पर बैठे विद्यामितान शिक्षकों का छलका दर्द, खून से लिखा पत्र- ‘संविलियन नहीं दे सकते तो इच्छामृत्यु दे दीजिए’
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9 दिन से धरने पर बैठे विद्यामितान शिक्षकों का छलका दर्द, खून से लिखा पत्र- ‘संविलियन नहीं दे सकते तो इच्छामृत्यु दे दीजिए’

Mor Anchal Desk 10 July 2026
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छत्तीसगढ़ के भिलाई में राज्य अतिथि शिक्षक (विद्यामितान) अपनी लंबित मांगों को लेकर पिछले 9 दिनों से अनिश्चितकालीन धरने पर बैठे हैं। गुरुवार को हुई राज्य कैबिनेट बैठक में संविलियन और समायोजन को लेकर कोई घोषणा नहीं होने के बाद आंदोलनकारी शिक्षकों में नाराजगी और बढ़ गई।

इसी के विरोध में शिक्षकों ने शिक्षा मंत्री के नाम खून से पत्र लिखकर अपनी मांगें दोहराईं। पत्र में उन्होंने लिखा कि यदि सरकार उन्हें संविलियन या सेवा सुरक्षा नहीं दे सकती, तो उन्हें इच्छामृत्यु की अनुमति दे दी जाए। धरना स्थल पर कई शिक्षक अपनी पीड़ा बताते हुए भावुक हो गए और तहसीलदार के सामने रो पड़े।

कलेक्ट्रेट पहुंचकर सौंपा ज्ञापन

राज्य अतिथि शिक्षक कल्याण संघ, छत्तीसगढ़ के बैनर तले चल रहे आंदोलन के दौरान बड़ी संख्या में शिक्षक रैली निकालकर कलेक्ट्रेट पहुंचे। यहां उन्होंने तहसीलदार के माध्यम से शिक्षा मंत्री के नाम ज्ञापन और खून से लिखा पत्र सौंपा।

‘10 साल से पढ़ा रहे, फिर भी नौकरी की सुरक्षा नहीं’

आंदोलनकारी शिक्षकों का कहना है कि वे पिछले लगभग 10 वर्षों से प्रदेश के सरकारी स्कूलों में पढ़ा रहे हैं। इसके बावजूद उन्हें न तो स्थायी सेवा मिली है, न सम्मानजनक वेतन और न ही भविष्य की कोई सुरक्षा।

उनका कहना है कि नियमित शिक्षकों की तरह समान जिम्मेदारियां निभाने के बावजूद उन्हें काफी कम मानदेय मिलता है, जिससे आर्थिक और मानसिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

संघ का आरोप- मंत्री ने बात तक नहीं सुनी

संघ के प्रदेश अध्यक्ष राज यादव ने आरोप लगाया कि वे अपनी मांगों को लेकर स्कूल शिक्षा मंत्री से मिलने पहुंचे थे। उन्होंने अनुरोध किया था कि कैबिनेट बैठक में उनकी मांगों पर निर्णय लिया जाए, ताकि आंदोलन समाप्त किया जा सके।

उनका आरोप है कि उनकी बात गंभीरता से नहीं सुनी गई और उन्हें कार्यालय से बाहर जाने के लिए कहा गया। (यह आंदोलनकारी पक्ष का आरोप है।)

चुनावी वादे पूरे करने की मांग

शिक्षकों का कहना है कि चुनाव के दौरान संविलियन और समायोजन का आश्वासन दिया गया था। उन्हें उम्मीद थी कि हालिया कैबिनेट बैठक में इस दिशा में कोई निर्णय होगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।

संघ ने सरकार से मांग की है कि चुनावी वादों और "मोदी की गारंटी" के अनुरूप अतिथि शिक्षकों के संविलियन या समायोजन पर जल्द निर्णय लिया जाए। साथ ही "समान कार्य के लिए समान वेतन" और सेवा सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।

 

नोट: इस खबर में आंदोलनकारी शिक्षकों द्वारा लगाए गए आरोप और उनकी मांगों को उनके पक्ष के रूप में प्रस्तुत किया गया है। सरकार की ओर से यदि इस मामले में कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया जारी होती है, तो उसे भी खबर में शामिल किया जाना चाहिए ताकि रिपोर्ट संतुलित रहे।