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रायपुर | छत्तीसगढ़ की राजनीति और सामाजिक संगठनों के बीच पिछले कई महीनों से चर्चा का केंद्र रहे छत्तीसगढ़ क्रांति सेना के प्रमुख अमित बघेल आज, 22 जुलाई 2026 को जेल से बाहर आने वाले हैं। उनकी रिहाई को लेकर समर्थकों में भारी उत्साह है। रायपुर सेंट्रल जेल के बाहर सुबह से ही छत्तीसगढ़ क्रांति सेना के कार्यकर्ता जुटने लगे हैं और फूल-मालाओं तथा जयघोष के साथ भव्य स्वागत की तैयारियां की जा रही हैं।
कैसे शुरू हुआ पूरा विवाद?
यह पूरा मामला अक्टूबर 2025 में उस समय सुर्खियों में आया, जब छत्तीसगढ़ महतारी की प्रतिमा को नुकसान पहुंचाए जाने की घटना के बाद प्रदेशभर में विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए। इस दौरान अमित बघेल और छत्तीसगढ़ क्रांति सेना ने कई स्थानों पर प्रदर्शन किए और प्रशासन के खिलाफ तीखी बयानबाजी की।
इसी दौरान अमित बघेल का एक वीडियो और बयान सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ। पुलिस का आरोप था कि इस बयान से सामाजिक सौहार्द और कानून-व्यवस्था प्रभावित हो सकती है। इसके बाद देवेंद्र नगर थाना सहित रायपुर के अलग-अलग थानों में कई एफआईआर दर्ज की गईं।

सरेंडर से पहले ही हुई गिरफ्तारी
अमित बघेल ने सार्वजनिक रूप से घोषणा की थी कि वे 5 दिसंबर 2025 को रायपुर के देवेंद्र नगर थाना पहुंचकर आत्मसमर्पण करेंगे। हालांकि, पुलिस के अनुसार थाने पहुंचने से पहले ही उन्हें हिरासत में लेकर गिरफ्तार कर लिया गया और न्यायिक अभिरक्षा में भेज दिया गया।
फिर बलौदाबाजार हिंसा मामले में भी नाम जुड़ा
गिरफ्तारी के बाद जनवरी 2026 में अमित बघेल का नाम 10 जून 2024 के बहुचर्चित बलौदाबाजार हिंसा प्रकरण में भी सामने आया। जांच एजेंसियों ने आरोप लगाया कि प्रदर्शन के दौरान दिए गए भाषणों ने भीड़ को उकसाने में भूमिका निभाई। इसी मामले में उन्हें आरोपी बनाया गया। अमित बघेल और उनके समर्थकों ने इन आरोपों से इनकार किया है और इन्हें राजनीतिक कार्रवाई बताया है।
हाईकोर्ट से राहत नहीं, सुप्रीम कोर्ट से मिली जमानत
बलौदाबाजार हिंसा मामले में पहले छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी थी। इसके बाद मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, जहां 17 जुलाई 2026 को सर्वोच्च न्यायालय ने अमित बघेल को जमानत दे दी। कोर्ट ने जमानत के साथ कुछ शर्तें भी लगाईं, जिनमें तीन महीने तक रायपुर जिले में प्रवेश नहीं करने की शर्त भी शामिल है।

आज रहेगी सबकी नजर
अमित बघेल की रिहाई के बाद यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि वे जेल से बाहर आने के बाद क्या बयान देते हैं और छत्तीसगढ़ क्रांति सेना आगे की रणनीति क्या तय करती है। राजनीतिक और सामाजिक हलकों की नजरें भी उनकी पहली सार्वजनिक प्रतिक्रिया पर टिकी हुई हैं।