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बीजापुर में सड़क नहीं, खाट बनी एंबुलेंस: 7 किमी पैदल चलकर बचाई युवक की जान, बारिश में कट गया गांव का संपर्क
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बीजापुर में सड़क नहीं, खाट बनी एंबुलेंस: 7 किमी पैदल चलकर बचाई युवक की जान, बारिश में कट गया गांव का संपर्क

Mor Anchal Desk 19 July 2026
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बीजापुर | छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले के उसूर ब्लॉक के रायगुड़ा गांव में बारिश ने एक बार फिर ग्रामीण इलाकों की बदहाल तस्वीर सामने ला दी। लगातार बारिश के कारण कच्चे रास्ते दलदल में बदल गए और गांव का संपर्क मुख्य सड़क से पूरी तरह टूट गया। इसी बीच एक युवक की अचानक तबीयत बिगड़ने पर परिजनों और ग्रामीणों को उसे खाट पर लिटाकर करीब 7 किलोमीटर पैदल मुख्य सड़क तक ले जाना पड़ा, जहां पहले से खड़ी 108 एंबुलेंस के जरिए उसे अस्पताल पहुंचाया गया।

घटना का वीडियो भी सामने आया है, जिसमें एंबुलेंस कर्मचारी और ग्रामीण बारिश के बीच खेतों, पगडंडियों और कीचड़ भरे रास्तों से खाट उठाकर मरीज को ले जाते दिखाई दे रहे हैं। यह दृश्य क्षेत्र में बुनियादी सुविधाओं की कमी और ग्रामीणों की मजबूरी को उजागर करता है।

सांस लेने में दिक्कत के बाद बिगड़ी तबीयत

जानकारी के अनुसार, रायगुड़ा गांव के स्कूलपारा निवासी सावन मरकाम (22) की 18 जुलाई की रात अचानक तबीयत बिगड़ गई। उसे सांस लेने में गंभीर परेशानी होने लगी। रात करीब 9 बजे परिजनों ने 108 एंबुलेंस सेवा को सूचना दी। एंबुलेंस गांव के लिए रवाना हुई, लेकिन रास्ता खराब होने के कारण गांव तक नहीं पहुंच सकी और बीच रास्ते में ही रुकना पड़ा।

ग्रामीण और एंबुलेंस स्टाफ बने सहारा

मरीज की गंभीर हालत को देखते हुए ग्रामीणों ने 108 एंबुलेंस के ईएमटी राजेश वालदास और पायलट विनोद मंचराला के साथ मिलकर सावन मरकाम को खाट पर लिटाया। इसके बाद सभी ने लगभग 7 किलोमीटर तक कीचड़, खेतों और संकरे रास्तों से पैदल चलकर उसे मुख्य सड़क तक पहुंचाया। वहां पहले से मौजूद एंबुलेंस में मरीज को शिफ्ट कर अस्पताल ले जाया गया।

हर बारिश में कट जाता है गांव का संपर्क

ग्रामीणों का कहना है कि रायगुड़ा सहित आसपास के कई गांव आज भी सर्व-मौसम सड़क से नहीं जुड़े हैं। बारिश शुरू होते ही कच्चे रास्ते पूरी तरह खराब हो जाते हैं, जिससे गांवों का संपर्क बाहरी दुनिया से लगभग टूट जाता है। ऐसे में मरीजों, गर्भवती महिलाओं और बुजुर्गों को अस्पताल पहुंचाना सबसे बड़ी चुनौती बन जाता है।

दशकों से सड़क की मांग, समाधान अब तक नहीं

स्थानीय लोगों का आरोप है कि वर्षों से गांव तक पक्की सड़क बनाने की मांग की जा रही है, लेकिन अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। सड़क के अभाव का असर केवल स्वास्थ्य सेवाओं पर ही नहीं, बल्कि बच्चों की शिक्षा, किसानों की आवाजाही और रोजमर्रा के जीवन पर भी पड़ रहा है।

ग्रामीणों ने की स्थायी समाधान की मांग

ग्रामीणों ने प्रशासन से रायगुड़ा गांव तक सर्व-मौसम सड़क का निर्माण कराने, आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने और दुर्गम क्षेत्रों में बेहतर संपर्क व्यवस्था विकसित करने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि समय रहते सड़क बन जाती, तो किसी मरीज को इलाज के लिए खाट पर ढोने जैसी दर्दनाक स्थिति का सामना नहीं करना पड़ता।