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रायपुर। केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय की परफॉर्मेंस ग्रेडिंग इंडेक्स फॉर डिस्ट्रिक्ट्स (PGI-D) 2025-26 रिपोर्ट में छत्तीसगढ़ की स्कूली शिक्षा की मिश्रित तस्वीर सामने आई है। रिपोर्ट के अनुसार रायगढ़ जिला 329 अंकों के साथ प्रदेश में पहले स्थान पर रहा। इसके बाद सरगुजा (324 अंक) दूसरे और बीजापुर (323 अंक) के साथ तीसरे स्थान पर रहा।
हालांकि सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि प्रदेश का सर्वश्रेष्ठ जिला भी 600 में से केवल 329 अंक ही हासिल कर सका। इससे साफ है कि राज्य की स्कूली शिक्षा में अभी भी सुधार की बड़ी गुंजाइश मौजूद है।
डिजिटल शिक्षा में रायपुर सबसे आगे
राजधानी रायपुर ने डिजिटल लर्निंग श्रेणी में प्रदेश के सभी जिलों को पीछे छोड़ दिया। रायपुर को 50 में से 24 अंक मिले, जो राज्य में सबसे अधिक हैं।
इसके बावजूद समग्र प्रदर्शन में रायपुर शीर्ष तीन जिलों में जगह नहीं बना पाया। इसका मतलब है कि केवल डिजिटल संसाधन पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि सीखने के परिणाम, कक्षा शिक्षण और अन्य मानकों में भी सुधार की जरूरत है।
देशभर की तस्वीर भी उत्साहजनक नहीं
रिपोर्ट के अनुसार देश के 784 जिलों में से 473 जिलों के प्रदर्शन में सुधार दर्ज किया गया, जबकि 89 जिलों ने अपनी ग्रेड में सुधार किया।
इसके बावजूद लगातार दूसरे वर्ष भी देश का कोई जिला 'उत्कर्ष' या 'उत्तम-1' ग्रेड हासिल नहीं कर पाया। केवल 19 जिले ही 'उत्तम-2' श्रेणी तक पहुंच सके।
बच्चों की पढ़ाई ही सबसे बड़ा पैमाना
PGI-D रिपोर्ट में कुल 600 अंक निर्धारित हैं, जिनमें से 290 अंक (करीब 48%) केवल इस आधार पर दिए जाते हैं कि बच्चे कितना सीख रहे हैं और उनकी शैक्षणिक उपलब्धि कैसी है।
इसके अलावा मूल्यांकन में शामिल हैं—
प्रभावी कक्षा संचालन – 90 अंक
बुनियादी ढांचा एवं छात्र सुविधाएं – 51 अंक
डिजिटल लर्निंग – 50 अंक
स्कूल सुरक्षा – 35 अंक
शासन एवं प्रशासनिक व्यवस्था – 84 अंक
यानी रिपोर्ट का मुख्य फोकस केवल भवन या सुविधाएं नहीं, बल्कि शिक्षा की वास्तविक गुणवत्ता है।
बस्तर में ढांचा बेहतर, डिजिटल शिक्षा कमजोर
बस्तर संभाग के जिलों में दंतेवाड़ा ने अपेक्षाकृत बेहतर प्रदर्शन किया। जिले को कुल 292 अंक मिले और बुनियादी ढांचे की श्रेणी में 51 में से 43 अंक हासिल हुए।
वहीं सुकमा को कुल 255 अंक मिले। डिजिटल लर्निंग में सुकमा को 50 में से केवल 6 अंक, जबकि नारायणपुर को 7 अंक मिले। इससे स्पष्ट है कि दूरस्थ और आदिवासी क्षेत्रों में डिजिटल शिक्षा आज भी बड़ी चुनौती बनी हुई है।