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रायपुर | प्रधानमंत्री ई-बस सेवा योजना के तहत छत्तीसगढ़ के रायपुर, बिलासपुर, दुर्ग-भिलाई और कोरबा को कुल 240 इलेक्ट्रिक बसों की मंजूरी मिले एक साल से अधिक समय बीत चुका है। लेकिन हैरानी की बात यह है कि अब तक प्रदेश के किसी भी शहर में एक भी ई-बस का संचालन शुरू नहीं हो सका है।
वहीं दूसरी ओर पड़ोसी राज्य मध्य प्रदेश के इंदौर सहित कई शहरों में इलेक्ट्रिक बसें नियमित रूप से सड़कों पर दौड़ रही हैं। ऐसे में छत्तीसगढ़ के लोग अब भी जर्जर सिटी बसों और निजी वाहनों पर निर्भर रहने को मजबूर हैं।
राजधानी रायपुर में सबसे ज्यादा इंतजार
राजधानी रायपुर में सार्वजनिक परिवहन लंबे समय से कमजोर स्थिति में है। मार्च 2024 में यहां 100 ई-बसों को मंजूरी मिली थी, लेकिन आज तक बसें नहीं पहुंचीं।
सबसे बड़ी वजह आवश्यक बुनियादी ढांचे का अधूरा होना बताया जा रहा है। जरवाय में डिपो और चार्जिंग स्टेशन का निर्माण चल रहा है, लेकिन अब तक केवल करीब 20 प्रतिशत काम ही पूरा हो पाया है।
पुरानी सिटी बसें हो चुकीं कबाड़
कोरोना महामारी से पहले प्रदेश के 9 शहरों में 378 सिटी बसें संचालित होती थीं। लंबे समय तक संचालन बंद रहने और रखरखाव नहीं होने के कारण इनमें से 272 बसें पूरी तरह कबाड़ हो चुकी हैं।
फिलहाल केवल 106 बसें बची हैं, जिनमें रोजाना महज 70 से 80 बसें ही सड़कों पर उतरती हैं। सबसे चिंताजनक स्थिति यह है कि दुर्ग-भिलाई और जगदलपुर में वर्तमान में एक भी सिटी बस संचालित नहीं हो रही है।
तीन बड़ी वजहों से अटकी योजना
ई-बस परियोजना में देरी के पीछे मुख्य कारण बताए जा रहे हैं—
बस ऑपरेटरों के साथ अनुबंध और औपचारिकताओं में देरी।
चार्जिंग स्टेशन, डिपो और बिजली संबंधी इंफ्रास्ट्रक्चर का अधूरा निर्माण।
राज्य सरकार से जरूरी वित्तीय मंजूरियां और पेमेंट सिक्योरिटी मैकेनिज्म देर से मिलना।
सरकार का दावा—दिसंबर तक शुरू होगा संचालन
केंद्रीय राज्य मंत्री तोखन साहू ने कहा कि राज्य सरकार को इंफ्रास्ट्रक्चर का काम तीन महीने में पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं और दिसंबर तक ई-बसों के संचालन का लक्ष्य रखा गया है।
वहीं ई-बस सेवा के नोडल अधिकारी अनुपम तिवारी के अनुसार, बिलासपुर के कोनी डिपो में 14 चार्जिंग पॉइंट तैयार हो चुके हैं। जैसे ही केंद्र से बसें उपलब्ध होंगी, संचालन शुरू कर दिया जाएगा।
लोगों को कब मिलेगी राहत?
ई-बस सेवा शुरू होने से प्रदूषण कम होगा, डीजल पर निर्भरता घटेगी और यात्रियों को आधुनिक, आरामदायक तथा पर्यावरण-अनुकूल सार्वजनिक परिवहन मिलेगा। हालांकि फिलहाल प्रदेश के लोगों को इसके लिए और इंतजार करना पड़ सकता है।