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बिलासपुर जिले से महज 13 किलोमीटर दूर तखतपुर ब्लॉक के शासकीय प्राथमिक शाला सरसेनी की तस्वीर सरकारी शिक्षा व्यवस्था की हकीकत बयां कर रही है। यहां पिछले सात वर्षों से एक ही कमरे में बालवाड़ी से लेकर पांचवीं कक्षा तक कुल छह कक्षाएं संचालित हो रही हैं।
स्कूल में कुल 41 विद्यार्थी अध्ययनरत हैं। पहले से पहली से पांचवीं तक की कक्षाएं एक कमरे में लग रही थीं, लेकिन वर्ष 2025 से बालवाड़ी को भी उसी कमरे में स्थानांतरित कर दिया गया। अब एक ही कमरे में अलग-अलग कतारों में छह कक्षाओं के बच्चे बैठकर पढ़ाई करने को मजबूर हैं।
दो शिक्षक, एक कमरा और छह कक्षाएं
स्कूल में केवल प्रधानपाठक निर्मल कौशिक और शिक्षिका पूनम पोर्ते पदस्थ हैं। जर्जर भवन के कारण वर्ष 2019 से सभी कक्षाएं एक ही कमरे में संचालित की जा रही हैं।
शिक्षकों का कहना है कि जब एक कक्षा को पढ़ाया जाता है तो दूसरी कक्षाओं के बच्चे प्रभावित होते हैं, जिससे पढ़ाई का माहौल बाधित होता है।
प्रधानपाठक निर्मल कौशिक ने कहा,
“एक कक्षा पढ़ाते हैं तो दूसरी कक्षा के बच्चे डिस्टर्ब हो जाते हैं। एक ही कमरे में छह कक्षाएं चलाना बच्चों और शिक्षकों, दोनों के लिए बेहद मुश्किल है।”
कमरे नहीं बने, टॉयलेट बन गए
बताया जा रहा है कि वर्ष 2024 में इस समस्या को लेकर खबर प्रकाशित होने के बाद शिक्षा विभाग के अधिकारी निरीक्षण के लिए पहुंचे थे। हालांकि अतिरिक्त कक्ष बनाने के बजाय पिछले दो वर्षों में दो नए टॉयलेट बना दिए गए और एक अन्य टॉयलेट का निर्माण भी प्रस्तावित है, जबकि अतिरिक्त कक्ष की समस्या अब भी जस की तस बनी हुई है।
सरपंच से विधायक तक लगाई गुहार
प्रधानपाठक के अनुसार, अतिरिक्त कक्ष निर्माण के लिए सरपंच, बीईओ, डीईओ, जनपद पंचायत, कलेक्टर कार्यालय और क्षेत्रीय विधायक तक कई बार आवेदन दिए गए।
सरपंच सहोरी राम खैरवार ने भी सुशासन शिविर में अतिरिक्त कमरों की मांग रखी थी, लेकिन जांच के दौरान अधिकारियों के बीच भ्रम की स्थिति बन गई और कथित तौर पर यह मान लिया गया कि वहां स्कूल संचालित ही नहीं हो रहा है।
अधिकारी बोले- मंजूरी मिलते ही होगा निर्माण
पूर्व बीईओ के. बैरागी ने कहा कि उन्हें निरीक्षण की जानकारी याद नहीं है। वहीं वर्तमान बीईओ दीपक गुप्ता का कहना है कि स्वीकृति मिलते ही अतिरिक्त कक्षों का निर्माण शुरू कराया जाएगा।