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छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले के एक युवक की जान मेकाहारा अस्पताल के डॉक्टरों ने समय रहते इमरजेंसी ऑपरेशन कर बचा ली। युवक के शरीर में पीठ की तरफ से तीर घुसकर पेट तक पहुंच गया था। उसकी हालत इतनी गंभीर थी कि इलाज में थोड़ी भी देरी जानलेवा साबित हो सकती थी।
गरियाबंद से मेकाहारा किया गया रेफर
अस्पताल प्रबंधन के अनुसार, घायल युवक को पहले गरियाबंद में प्राथमिक उपचार दिया गया। हालत गंभीर होने पर उसे बेहतर इलाज के लिए रायपुर स्थित डॉ. भीमराव अंबेडकर स्मृति चिकित्सालय (मेकाहारा) रेफर किया गया।
जांच में पता चला कि तीर पेट के भीतर तक धंस चुका था और अंदरूनी अंगों को नुकसान पहुंचा था। डॉक्टरों के अनुसार, आंत में छेद, अंदरूनी रक्तस्राव और गंभीर संक्रमण का खतरा बना हुआ था।
बिना समय गंवाए किया गया इमरजेंसी ऑपरेशन
मरीज के अस्पताल पहुंचते ही जनरल सर्जरी विभाग की टीम ने तत्काल ऑपरेशन करने का निर्णय लिया। ऑपरेशन के दौरान डॉक्टरों ने बेहद सावधानी से तीर को बाहर निकाला।
इसके बाद क्षतिग्रस्त अंगों और ऊतकों की मरम्मत की गई, अंदरूनी रक्तस्राव को नियंत्रित किया गया और पेट में जमा खून व संक्रमित द्रव को साफ किया गया।
अब खतरे से बाहर, लगातार हो रहा सुधार
सर्जरी के बाद युवक को पोस्ट-ऑपरेटिव आईसीयू में भर्ती किया गया, जहां विशेषज्ञ डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ की निगरानी में उसका इलाज जारी है।
अस्पताल प्रबंधन के अनुसार, मरीज की हालत अब स्थिर है और स्वास्थ्य में लगातार सुधार हो रहा है। यदि इसी तरह रिकवरी जारी रही तो उसे जल्द अस्पताल से छुट्टी दी जा सकती है।
विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम ने बचाई जान
इस जटिल ऑपरेशन का नेतृत्व जनरल सर्जरी विभाग की एचओडी डॉ. मंजू सिंह ने किया। टीम में डॉ. सुखलाल निराला, डॉ. मनीष साहू, डॉ. रोशन रत्नाकर तथा एनेस्थीसिया विभाग की डॉ. प्रतिभा जैन साह और डॉ. जया लालवानी शामिल रहीं।
अस्पताल अधीक्षक डॉ. संतोष सोनकर ने बताया कि मरीज बेहद गंभीर अवस्था में अस्पताल पहुंचा था। समय पर सर्जरी और डॉक्टरों की टीमवर्क की बदौलत उसकी जान बचाई जा सकी। उन्होंने कहा कि मेकाहारा में गंभीर ट्रॉमा और इमरजेंसी मरीजों के इलाज के लिए विशेषज्ञ टीम 24 घंटे उपलब्ध रहती है।