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रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा के मानसून सत्र में गुरुवार को फर्जी ग्रामसभा प्रस्तावों के आधार पर उद्योग स्थापना का मुद्दा जोरदार तरीके से गूंजा। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने सरकार से दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने और संबंधित कंपनियों को आवंटित जमीन निरस्त करने की मांग की। मंत्री के जवाब से असंतुष्ट कांग्रेस विधायकों ने सदन से वॉकआउट कर दिया।
प्रश्नकाल के दौरान भूपेश बघेल ने ग्राम अल्दा और देवरी-घुलघुल में उद्योग स्थापना के लिए कथित फर्जी ग्रामसभा प्रस्तावों का मामला उठाया। उन्होंने पूछा कि फर्जी दस्तावेजों के आधार पर उद्योगों को लाभ पहुंचाने वालों पर क्या कार्रवाई होगी और संबंधित कंपनियों को दी गई जमीन वापस ली जाएगी या नहीं।
सरकार की ओर से बताया गया कि दोनों कंपनियों ने अभी तक छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल से जल एवं वायु अधिनियम के तहत सहमति के लिए आवेदन ही नहीं किया है। इसलिए मंडल को ग्रामसभा के प्रस्ताव प्राप्त नहीं हुए।
सरकार ने यह भी स्वीकार किया कि ग्राम अल्दा के मामले में जालसाजी की शिकायत की जांच त्रि-सदस्यीय समिति ने की थी। जांच में सामने आया कि ग्रामसभा ने सर्वसम्मति से एनओसी (NOC) नहीं देने का प्रस्ताव पारित किया था, लेकिन कार्यवाही पंजी की अंतिम दो पंक्तियां किसने लिखीं, इसकी जानकारी किसी के पास नहीं है।
जांच रिपोर्ट के आधार पर 22 जून 2026 को तिल्दा-नेवरा थाना में बीएनएस की धारा 318(4) के तहत अज्ञात आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि केंद्र सरकार ने संबंधित परियोजनाओं को अभी तक पर्यावरणीय स्वीकृति नहीं दी है।
इस पर भूपेश बघेल ने सरपंच-सचिव के खिलाफ कार्रवाई और बालाजी स्पंज एंड आयरन लिमिटेड तथा अग्रसेन स्टील एंड पावर प्राइवेट लिमिटेड को आवंटित जमीन निरस्त करने की मांग दोहराई।
पर्यावरण मंत्री ओपी चौधरी ने कहा कि पुलिस मामले की जांच कर रही है। जांच पूरी होने के बाद दोषियों और संबंधित कंपनियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। हालांकि मंत्री के जवाब से असंतुष्ट कांग्रेस विधायकों ने सदन से वॉकआउट कर दिया।