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रायपुर। भगवान जगन्नाथ की पावन रथयात्रा के अवसर पर गुरुवार को राजधानी रायपुर सहित पूरे छत्तीसगढ़ में श्रद्धा, आस्था और उत्साह का माहौल देखने को मिला। रायपुर के अवंति विहार-गायत्री नगर स्थित श्री जगन्नाथ मंदिर से पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ भव्य रथयात्रा निकाली गई, जिसमें हजारों श्रद्धालु शामिल हुए।
रथयात्रा से पहले राज्यपाल और मुख्यमंत्री ने भगवान जगन्नाथ के रथ के आगे सोने की झाड़ू लगाकर पारंपरिक 'छेरापहरा' की रस्म निभाई। वहीं सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने विधिवत पूजा-अर्चना कर भगवान जगन्नाथ की प्रतिमा को अपने कंधे पर उठाकर रथ तक पहुंचाया। इस दौरान पूरा मंदिर परिसर "जय जगन्नाथ" के जयघोष से गूंज उठा।
इस वर्ष रथयात्रा की तैयारियां विशेष रूप से आकर्षण का केंद्र रहीं। ओडिशा से आए कलाकारों ने मंदिर, प्रवेश द्वार और रथों को पुरी की पारंपरिक शैली में रंग-बिरंगी धार्मिक पेंटिंग और आकर्षक सजावट से सजाया। वहीं महाप्रभु जगन्नाथ, बलभद्र और माता सुभद्रा की पूजा-अर्चना एवं सभी धार्मिक अनुष्ठानों को विधि-विधान से संपन्न कराने के लिए ओडिशा से विशेष पुजारियों को भी आमंत्रित किया गया था।
रथयात्रा के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना को देखते हुए ट्रैफिक पुलिस ने कई मार्गों पर डायवर्जन लागू किया और लोगों से यातायात नियमों का पालन करने की अपील की।
500 साल पुराने टुरी-हटरी जगन्नाथ मंदिर का ऐतिहासिक महत्व
रायपुर की पुरानी बस्ती स्थित टुरी-हटरी का जगन्नाथ मंदिर शहर के सबसे प्राचीन मंदिरों में गिना जाता है। लगभग 500 वर्ष पुराने इस मंदिर को पहले 'साहूकार मंदिर' के नाम से जाना जाता था। अग्रवाल परिवार द्वारा निर्मित इस मंदिर का अंग्रेजी शासनकाल में विस्तार और सौंदर्यीकरण कराया गया था। बाद में भगवान जगन्नाथ की प्रतिमा स्थापित होने के बाद यह मंदिर जगन्नाथ मंदिर के रूप में प्रसिद्ध हो गया। आज भी यहां हर वर्ष रथयात्रा के अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं।