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गरियाबंद, 9 अगस्त 2026। विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर अखिल भारतीय आदिवासी विकास परिषद, गरियाबंद द्वारा आयोजित ‘मूलनिवासी जुराव’ कार्यक्रम में जोहार छत्तीसगढ़ पार्टी के केंद्रीय अध्यक्ष अमित बघेल शामिल हुए। कार्यक्रम में उन्होंने आदिवासी एवं मूलनिवासी छत्तीसगढ़िया समाज की संस्कृति, भाषा, पहचान और जल-जंगल-जमीन के अधिकारों को लेकर संबोधित किया।

अमित बघेल ने कहा कि “हमर पुरखा मन जो सपना छत्तीसगढ़ राज बनाये के बेरा देखे रहिस, वो छत्तीसगढ़ राज तब बनही जब छत्तीसगढ़िया मन खुद नीति बनाही अउ खुद राज करही।” उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ राज्य का निर्माण केवल भौगोलिक सीमाओं के लिए नहीं, बल्कि यहां के मूलनिवासी समाज की पहचान, अधिकार और स्वाभिमान की रक्षा के लिए भी हुआ है।
वीर नारायण सिंह और गुंडाधुर के संघर्ष का किया जिक्र
अमित बघेल ने अपने संबोधन में छत्तीसगढ़ के स्वतंत्रता संग्राम और आदिवासी संघर्ष का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ संघर्ष करने वाले शहीद वीर नारायण सिंह छत्तीसगढ़ की माटी के लाल थे। वहीं बस्तर क्षेत्र में वीर गुंडाधुर ने भी अंग्रेजी सत्ता के खिलाफ संघर्ष का नेतृत्व किया।

उन्होंने कहा कि इसके बावजूद छत्तीसगढ़ की संस्कृति, भाषा और पहचान को राष्ट्रीय स्तर पर वह सम्मान नहीं मिल पाया, जिसकी समाज को अपेक्षा है।
“हक के लिए छह जन्म भी जेल जाना पड़े तो मंजूर”
हसदेव अरण्य में जंगल कटाई के विरोध में किए गए आंदोलन का उल्लेख करते हुए अमित बघेल ने कहा कि उन्होंने इस मुद्दे को लेकर करीब छह महीने जेल में बिताए हैं।
उन्होंने कहा, “हमर मूलनिवासी छत्तीसगढ़िया भाई-बहनों के हक-अधिकार के लिए छह जन्म भी जेल में रहना पड़े, तो मुझे मंजूर है।”
अमित बघेल ने कहा कि जल, जंगल और जमीन केवल प्राकृतिक संसाधन नहीं, बल्कि आदिवासी एवं मूलनिवासी समाज की जीवन व्यवस्था, संस्कृति और अस्तित्व का आधार हैं। उन्होंने समाज से अपने अधिकारों के प्रति जागरूक और एकजुट होने की अपील की।

वोट की ताकत समझने की अपील
राष्ट्रीय राजनीतिक दलों पर निशाना साधते हुए अमित बघेल ने कहा कि चुनाव के समय मतदाताओं के वोट को छोटी-छोटी वस्तुओं और प्रलोभनों से जोड़ दिया जाता है। उन्होंने लोगों से अपने वोट की कीमत और उसके महत्व को समझने की अपील की।
उन्होंने कहा कि मतदाताओं को यह सवाल करना चाहिए कि उनके वोट के बदले बेहतर शिक्षा, स्वास्थ्य सुविधाएं और स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार कैसे सुनिश्चित किया जाएगा।
बड़ी संख्या में समाजजन रहे मौजूद
कार्यक्रम में आदिवासी समाज एवं विभिन्न सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि, पदाधिकारी और बड़ी संख्या में समाजजन मौजूद रहे। कार्यक्रम का उद्देश्य मूलनिवासी समाज के बीच सामाजिक एकजुटता, सांस्कृतिक पहचान और अधिकारों के प्रति जागरूकता को मजबूत करना रहा।